Vrindavan Temples

Tatiya Sthan Vrindavan | tatiya sthan history in hindi

Tatiya Sthan Vrindavan
Tatiya Sthan Vrindavan

Tatiya Sthan Vrindavan

वृंदावन में tatiya Sthan (टटिया स्थान) एक ऐसी जगह है जो आपको शुद्ध प्राकृतिक सुंदरता से जोड़ती है वृंदावन के शहरीकरण के बीच, यह दिव्य स्थान कई शताब्दियों जैसा ही है, यह प्रक्रति के बहुत ही निकट सम्बन्ध को दर्शाता है। यह पवित्रता, दिव्यता और आध्यात्मिकता का स्थान है। यही इस दिव्य स्थान को भीड़ से अलग बनाती है।

Tatiya Sthan वृन्दावन में एकमात्र स्थान है जो भक्तों को प्रकृति से जोड़ता है। यह स्थान कई पेड़ों का घर है जो किसी प्रकार की दिव्यता को जोड़ते हैं, जिसे उस स्थान के वातावरण में महसूस किया जा सकता है। बिजली नहीं होने के कारण सूर्यास्त के बाद अंधेरा हो जाता है।

दिव्य स्थान मोहिनी बिहारी के रूप में जानी जाने वाली मूर्ति के साथ केंद्रित है जो भगवान कृष्ण की मनोरम झलक का सम्मान करती है। राधा अष्टमी तातिया स्थान में मनाया जाने वाला सबसे प्रसिद्ध त्योहार है जो देश के कोने-कोने से भक्तों को आकर्षित करता है। इस त्योहार पर, मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है जो स्वामी हरिदास जी की पवित्र चप्पलों और बर्तनों की एक झलक देखना चाहते हैं।

Tatiya Sthan Vrindavan हरिदास जी के सातवें अनुयायी ललित किशोरी का ध्यान स्थल था। हरिदास जी निधिवन में तपस्या करते थे और उनके अनुयायिओं द्वारा यहाँ भजन कीर्तन किया जाता था ।

ललित किशोरी ने निधिवन को छोड़ दिया और यहां ध्यान लगाया क्योंकि यह स्थान वृंदावन के अन्य हिस्सों से एकांत में था और यमुना नदी के तट के सबसे करीब था। बाद में दिव्य स्थान को बांस से घेर दिया गया था, इस स्थान को तातिया स्थान नाम दिया गया था, क्योंकि हिंदी में बांस का अर्थ तातिया होता है।

मोहिनी बिहारी के रूप में जानी जाने वाली मूर्ति के साथ केंद्रित है जो भगवान कृष्ण की मनोरम झलक का सम्मान करती है। राधा अष्टमी तातिया स्थान में मनाया जाने वाला सबसे प्रसिद्ध त्योहार है जो देश के कोने-कोने से भक्तों को आकर्षित करता है। इस त्योहार पर, मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है जो स्वामी हरिदास जी की पवित्र चप्पलों और बर्तनों की एक झलक देखना चाहते हैं।

 Tatiya Sthan मंदिर का अनोखा नियम…

tatiya sthan templeऐसा कहा जाता है कि श्री ललितमोहिनिदास जी के समय इस स्थान का यह नियम था कि जो भी आटा-दाल-घी दूध भेट में आवे उसे उसी दिन ही ठाकुर भोग ओर साधू सेवा में लगाया जाता है। संध्या के समय के बाद सबके बर्तन खाली करके धो माज के उलटे करके रख दिए जाते है

कभी भी यहाँ अन्न सामग्री की कमी ना रहती थी। एक बार दिल्ली के मुश्लिम शासक ने जब यह नियम सुना तो परीक्षा के लिए अपने एक हिंदू सेवक के हाथ एक पोटली में मोती भर कर सेवा के लिए भेजे। श्री महंत जी बोले: वाह खूब समय पर आप भेट लाये है।

महंत जी ने तुरंत उन्हें खरल में पिसवाया ओर पान बीडी में भरकर श्री ठाकुर जी को भोग में अर्पण कर दिया कल के लिए कुछ नहीं रखा। उनका यह भी नियम था कि चाहे कितने मिष्ठान व्यंजन पकवान भोग लगे स्वयं उनमें से प्रसाद रूप में कणिका मात्र ग्रहण करते सब पदार्थ संत सेवा में लगा देते ओर स्वयं मधुकरी करते।

जब मजदूर का घड़ा अशर्फियों से भर गया

एक दिन श्रीस्वामी ललितमोहिनी देव जी संत-सेवा के पश्चात प्रसाद पाकर विश्राम कर रहे थे, किन्तु उनका मन कुछ बेचैन सा था। वे बार-बार आश्रम के प्रवेश द्वार की तरफ देखते, वहाँ जाते और फिर लौट आते।

वहाँ रह रहे संत ने पूंछा: स्वामी जी ! किसको देख रहे है आपको किसका इन्तजार है?
स्वामी जी बोले: एक मुसलमान भक्त है श्री युगल किशोर जी की मूर्तियाँ लाने वाला है उसका इन्तजार कर रहा हूँ।

इतने मे वह मुसलमान भक्त सिर पर एक घड़ा लिए वहाँ आ पहुँचा और दो मूर्तियों को ले आने की बात कही। श्री स्वामी जी के पूंछने पर उसने बताया, कि डींग के किले में भूमि कि खुदाई चल रही है। मै वहाँ एक मजदूर के तौर पर खुदाई का काम कई दिन से कर रहा हूँ।

कल खुदाई करते में मुझे यह घड़ा दीखा तो मैंने इसे मुहरो से भरा जान कर फिर दबा दिया ताकि साथ के मजदूर इसे ना देख ले। रात को फिर मै इस कलश को घर ले आया | घर आकर जब कलश में देखा तो इससे ये दो मूर्तियाँ निकली, एक फूटी कौड़ी भी साथ ना थी।

स्वामी जी: इन्हें यहाँ लाने के लिए तुम्हे किसने कहा ?
मजदूर: जब रात को मुझे स्वप्न में इन प्रतिमाओ ने आदेश दिया कि हमें सवेरे वृंदावन में टटिया स्थान पर श्री स्वामी जी के पास पहुँचा दो इसलिए में इन्हें लेकर आया हूँ।

स्वामी जी ने मूर्तियों को निकाल लिया और उस मुसलमान भक्त को खाली घड़ा लौटते हुए कहा भईया! तुम बड़े भाग्यवान हो भगवान तुम्हारे सब कष्ट दूर करेगे।

वह मुसलमान मजदूर खाली घड़ा लेकर घर लौटा, रास्ते में सोच रहा था कि इतना चमत्कारी महात्मा मुझे खाली हाथ लौटा देगा – मैंने तो स्वप्न में भी ऐसा नहीं सोचा था। और उदास होकर एक टूटे मांझे पर आकर सो गया।

पत्नी ने पूँछा: हो आये वृंदावन ?
क्या लाये स्वामी जी से ?
भर दिया घड़ा अशर्फिर्यो से ?
क्या जवाव देता इस व्यंग का ?
उसने आँखे बंद करके करवट बदल ली।
पत्नी ने कोने में घड़ा रखा देखा तो लपकी उस तरफ देखती है कि घड़ा तो अशर्फियों से लबालव भरा है,

आनंद से नाचती हुई पति से आकर बोली वाह ! इतनी दौलत होते हुए भी क्या आप थोड़े से मुरमुरे ना ला सके बच्चो के लिए?

अशर्फियों का नाम सुनते ही भक्त चौककर खड़ा हुआ और घड़े को देखकर उसकी आँखों से अश्रु धारा बाह निकली।


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