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Sharad Purnima 2023: वृन्दावन में श्रीराधाकृष्ण के महारास का दिन

Sharad Purnima – वृन्दावन में श्रीराधाकृष्ण के महारास का दिन

शरद पूर्णिमा
Sharad Purnima

Sharad Purnima – वृन्दावन में श्रीराधाकृष्ण के महारास का दिन, शरद पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी 16108 गोपियों के साथ महारास किया था।

Sharad Purnima के दिन चंद्रमा पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है, इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसता होती है और मां लक्ष्मी भी पृथ्वी पर वृन्दावन में हो रहे महारास को देखने आती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह रात्रि स्वास्थ्य व सकारात्मकता प्रदान करने वाली मानी जाती है।

Sharad Purnima के दिन खीर बना कर खुले आकाश के नीचे जाली से ढक कर रख देते हैं। इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। यह पर्व वृन्दावन में बृजवासियों को सर्वाधिक प्रिय है। क्योकि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास नृत्य किया था।

krishna maharaas
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MahaRaas लीला को समझने की दो दृष्टियां हो सकती हैं। एक तो यह कि सारा ब्रह्मांड नृत्य रत है, बीच में प्रकाश पुंज स्वरूप कृष्ण तत्व स्थिर है और समस्त तारामंडल हैं बृज की गोपियां। इसी दृश्य की तुलना वृंदावन में हुए महारास से की जा सकती है। दूसरा अर्थ है इंद्रियों से बंधे जीव सब कुछ भूल कर पूर्ण पुरुष श्री कृष्ण के साथ नर्तन करते हुए अपने आप को पूर्ण रूप से कृष्ण में समाहित कर देना।

Sharad Purnima – वृन्दावन में श्रीराधाकृष्ण के महारास लीला 

वृन्दावन में अश्विन माह की पूर्णिमा को रासेश्वर माधव ने स्वयं महारास का आरम्भ किया जब शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है उस समय श्याम सुन्दर ने यमुना के किनारे वृन्दावन में रासेश्वरी श्रीराधाजी और गोपियों के साथ महारास किया ।

महारास के समय श्री वृन्दावन धाम ने भी दिव्यरूप धारण करके काम पूरक कल्पवृक्ष तथा माधवी लताओं से समलंकृत हो अपनी शोभा से वृन्दावन को अति शोभा के पात्र बनाया अनेक प्रकार के पुष्प लताऐं गिरिराज जी की तलहटी में तो वायु के स्वर की मधुर-मधुर ध्वनि शरीर के रोगटों को खड़ा करने वाला दृश्य मोर पपियाओ तोता, मैना तथा श्रीयमुनाजी का कलरव मन को मुग्ध कर रहा था ।

ऐसे श्रीवृन्दावन धाम में श्री प्रिया प्रियतम ने रास किया इस वृज धाम की आलोकिक माया की व्याख्या को विस्तार पूर्वक समझाना हम जैसे जिव के भाग्य में कहाँ ?

चन्द्रमा ने भी बृज मंडल को अपने प्रकाश की किरणों से उस रात अपनी चांदनी से प्रकाशमान किया शरद पूर्णिमा की वो रात अपने आप में कभी ना भूलने वाले अनेकों लम्हों को अपने आप में समाहित कर रही थी कहते है महारास की वो रात पूरे छ महीने की थी मानो जैस समय भी उस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए रुक सा गया था ।

महारास को देखने के लिए क्या देव, क्या गन्धर्व सभी मनो लालाइत थे वैकुण्ठ धाम से माता श्रीलक्ष्मी स्वयं वृन्दावन आई किन्तु श्री धाम वृन्दावन में महारास के समय वृन्दावन की सीमा पर ही यमुना जी ने माता लक्ष्मी जी को रोक दिया और माता लक्ष्मी जी ने वृन्दावन के बाहर बेलमन में बैठ कर तपस्या करने लगी ।

जब महारास का आरम्भ हुआ तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाँसुरी को बजाना सुरु किया जिसके फलस्वरूप समस्त ब्रम्हांड मुरली की धुन सुन कर वसीभूत हो गया तो वंशी की धुन सुनकर महादेव जी Kailash Maansarovar से निज वृन्दावन में आ गए स्वयं भोले नाथ भगवन श्रीकृष्ण जी का महारास देखने के लिए लालायित थे ।

तो माता पार्वती जी भी भगवन शिव जी के पीछे पीछे आ गयी , उन पर भी न रहा गया | परन्तु पार्वती माता तो महारास में प्रवेश कर गयी परन्तु गोपीयो ने भगवन शिव को रोक दिया | गोपियों ने कहा कि महारास में केवल गोपियों का आगमन है यह तो गोपियों का महारास है यहां पुरुषों का आना मना है सभी असंख्य गोपियां रात्रि के समय महारास करेंगी। यहां तो केवल कृष्ण जी ही पुरुष हैं।

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भोलेनाथ जी बोले मेरी पत्नी अंदर गई है मैं रात्रि यहां क्या करूंगा मैं बहुत दूर Kailash Maansarovar से आया हूं तभी गोपिया बोली आप अंदर नहीं जा सकते। भोलेनाथ गोपियों से प्रार्थना करने लगे मैं महारास देखे बिना नहीं जाऊंगा गोपी बोली मुझे आप पर दया आ रही है,

आप कहे तो एक उपाय है। एक गोपी बोली की आप यमुना जी में स्नान करोगे तो गोपी रूप धारण हो जाएगा तभी भोलेनाथ ने जाकर यमुना में स्नान किया, तो भोलेनाथ गोपी रूप में आ गए और महारास में प्रवेश किया महारास में प्रवेश किया।

Sharad Purnima : शरद पूर्णिमा जानें इस पर्व की मान्यताएं और महत्व

शरद पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं-

1. भगवान श्री कृष्ण ने इस दिन की थी महारास लीला- इसदिन भगवान श्री कृष्ण ने ‘महारास लीला’ की थी। इसलिए इसे महारास पूर्णिमा भी कहते है। इस दिन प्रात: स्नान करके भगवान श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी या अपने इष्ट देव का पूजन अर्चना करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए।

2. माता लक्ष्मी करती हैं रात्रि में विचरण- शरद पूर्णिमा को व्रत भी किया जाता है और माता लक्ष्मी, कुबेर और इन्द्र देव का पूजन और श्री सूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करते है ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी रात्रि में वृन्दावन विचरण करती है और भक्तों पर धन-धान्य से पूर्ण करती है।

3. सूई में धारा पिरोने से आंखों की रोशनी बढ़ती है- शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में सुई में धागा पिरोने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और प्रात:काल सूर्य उदय से पूर्व इस खीर का प्रसाद के रूप में सेवन करना चाहिए जिससे वर्ष भर अरोग्यता होती है।


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