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Shri Krishna Janmbhoomi Temple, Mathura

Shri Krishna Janmbhoomi Temple

Shri Krishna Janmbhoomi Temple
Shri Krishna Janmbhoomi Temple

Shri Krishna Janmbhoomi Temple

Shri Krishna Janmbhoomi Temple: मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने क्रूर राजा कंस के कारागार में प्रकट होकर उनके पिता वासुदेव और उनकी माता देवकी को मुक्त किया था। उसका उद्देश्य बुराई का नाश करना, सद्गुणों की रक्षा करना और धर्म को मजबूती से स्थापित करना था।

जेल की कोठरी के प्रवेश द्वार के निकट, मंदिर है जहाँ अस्तभुज माँ योगमाया प्रकट हुई थी। पवित्र स्थान में प्रवेश करते ही गर्भगृह का दिव्य वातावरण भक्तों के दिलों को रोमांचित कर देता है, और उनके मन में दृढ़ विश्वास की भावना पैदा होती है कि वास्तव में यही वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने स्वयं को प्रकट किया था।

श्रीगोविन्दस्तोत्रम्

जन्मभूमि क आसपास का इलाका मल्ल पुरा के नाम से जाना जाता है  क्युकि कंस यहाँ मल्ल युद्ध किया करता था। इस प्राचीन मंदिर में भगवान श्री राधाकृष्ण जी की बड़ी मूर्ति है। वही मुख्य मंदिर कहलाता है, जहा जन्माष्टमी मनाई जाती है। जिसमें नवग्रह की मूर्ति दुर्गाजी की मूर्ति और शिवज की मूर्ति जो पारधातु से बानी है।

मंदिर की दूसरी तरफ विधुत चलित लील स्थल है , नीचे की ओर एक गुफा बन है जिसमें कई झाकिया है। रंगीन कलाकृति से परिसर की छत पर बृज की लीलाओ की वर्णन किया गया है। इसे देख कर यात्री मंत्रमुग्ध हो जाता है और दूसरी तरफ भगवान श्री कृष्ण का गर्भ गृह बना हुआ है | जिसे भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थान व जेल कारागार भी कहते है।

History of Shri Krishna Janmbhoomi Mathura:

कई साल पहले इस जन्मभूमि को कई बार नष्ट किया तथा कई बार बनबाया लगभग सन्न ११५० में मथुरा के राजा विजयपाल हुआ करते थे, उस समय एक भक्त ने श्री कृष्ण जन्मस्थान को बनबाया था।

जिस समय महाप्रभु क बृज आगमन हुआ था उस समय ब्रज में मुग़ल सम्राट हुमायु के राज्य काल में हुआ था उसके बाद अत्याचारी मुगलों ने जन्मभूमि मंदिर को धवस्त किया और बाद में ओरछा क महाराज वीरसिंह देव ने सन्न 1690 ई. में 3700000 रूपए की लागत लगा कर आदि केशवदेव क विशाल मंदिर बनबाया।

किन्तु अत्याचारी धूर्त औरंगजेब न 1669 ई. में केशवदेव मंदिर को तुड़वाया। पुजारियों ने प्रचीन विग्रह को जिला कानपुर के इटावा शहर के गांव राजधान में स्थापित किया। आज भी यह मंदिर राजधान गांव में स्थापित है।

सर्वप्रथम इस जन्मभूमि को १५वी शताब्दी में लगभग सन्न 1450 , सिकंदर लोधी , मोहम्मद गौरी ने और 1669 में औरंगजेव ने तुड़वाया और औरंगजेव कहता था कि यह हमारी जगह है | हिन्दू भक्त कहते है की यह हमारी जगह है इस बात को लेकर कई बार लड़ाई हुई थी।

Shri Krishna Janmbhoomi Temple

क्योंकि औरंगजेब हिन्दुओ के मंदिरो को देख कर दुखी होता था। अतः सिद्ध हुआ की यहीं भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थान है, क्योंकि सफाई के अनुसार एक चवूतरा मिला और कई अवशेष मिले जबकि औरंगजेब ने छः बंदी गृह को तुड़वाया और उसी मलवे से मस्जिद बनवा दी और सातवा कारागार बस बचा जो की आज जन्मस्थान के रूप में है।

कालांतर क बाद जन्मभूमि का धीरे धीरे जीर्णोद्धार होने लगा, सर्वप्रथम जुगल किशोर बिरलाजी बिरलाजी , मदनमोहन मालवीय , हनुमान पोद्धार , जय डालमिया जो कि राजस्थान के रहने वाले थे। वर्तमान में उनक पुत्र विष्णु हरी डालमिया जी इस मंदिर की व्यवस्था देखते है।

Near Facilities Shri Krishna Janmbhoomi:

श्री कृष्ण जन्मभूमि के आस – पास का इलाका सुरक्षित है क्युकी वहाँ पुलिस प्रशासन की विशेष सुविधा की गयी है तथा तीर्थयात्रियों के लिए रेन बसेरा की सुविधा नि: शुल्क है तथा मंदिर प्रांगढ़ के बाहर अन्तर्राष्ट्र्य गेस्ट हाउस की सुविधा है।

तथा यहाँ यात्रियों के लिए उचित रेट में ठहरने की व्यवस्था की जाती है , जिसमें खान पान की भी सुविधा है। महीने में चार बार अमावस्या और दुर्गा अष्टमी के दिन भंडारा किया जाता है।

बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के सामान जैसे बैग , सूटकेस , मोबाइल , कैमरा , इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तु जो मंदिर में ले जाना वर्जित है उनके लिए लॉकर सुविधा है।

मंदिर के पास गेस्ट हाउस , धर्मशालाए , खरीददारी के लिए बाजार , मथुरा के प्रसिद्ध पेड़े , खेल खिलोने और भगवान कृष्ण से सम्बंधित पोशाक , श्रृंगार , मुकुट , कंठी माला की दुकानें भी हैं। जहाँ पर आप सुन्दर आकर्षित वस्तुएँ खरीद सकते है।


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